केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने रविवार को हायर एजुकेशनल इंस्टीट्यूट की पढ़ाई आंशिक तौर पर शुरू करने के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर (एसओपी) जारी कर दिया है। 21 सितंबर से कक्षाओं में पढ़ाई शुरू हो जाएगी। मंत्रालय ने कहा- इंस्टीट्यूट खोलने से पहले हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट से सलाह लेना होगी।

दूसरे शहर से आकर पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए हॉस्टल भी खुल सकेंगे। हालांकि, बाहर से आने के बाद छात्र को क्लास अटैंड करने से पहले 14 दिन क्वारैंटाइन में रहना होगा। इसके लिए इंस्टीट्यूट में क्वारैंटाइन सेंटर भी बनाना होगा।

इसके अलावा पढ़ाई शुरू होने पर टीचर्स, स्टूडेंट्स और स्कूल के स्टाफ को कम से कम 6 फीट की दूरी रखनी होगी। लगातार हाथ धोने, फेस कवर पहनने, छींक आने पर मुंह पर हाथ रखने, खुद की सेहत की मॉनिटरिंग करने और यहां-वहां न थूकने जैसी बातों का ध्यान रखना होगा। इंस्टीट्यूट में एंट्री प्वाइंट पर ही सभी की स्क्रीनिंग होगी। कोरोना के लक्षण वाले स्टूडेंट्स को एंट्री नहीं दी जाएगी।

ये हायर एजुकेशनल इंस्टीट्यूट खुल सकेंगे

  • स्किल और एंटरप्रेन्योरशिप ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट।
  • हायर एजुकेशनल इंस्टीट्यूट जहां पीएचडी, टेक्निकल और प्रोफेशनल प्रोग्राम चलते हैं और लेबोरेट्री, एक्सपेरिमेंटल वर्क की जरूरत है। ऐसे इंस्टीट्यूट हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट की सलाह के बाद खोले जा सकते हैं।
  • इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (आईटीआई)।
  • नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन या स्टेट स्किल डेवलपमेंट मिशन में रजिस्टर्ड शार्ट टर्म ट्रेनिंग सेंटर।
  • नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर एंटरप्रेन्योरशिप एंड स्मॉल बिजनेस डेवलपमेंट।
  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप
  • अन्य ट्रेनिंग प्रोवाइडर इंस्टीट्यूट।

इन नियमों का सभी को करना होगा पालन

  • इंस्टीट्यूट कंटेनमेंट जोन से बाहर होना चाहिए।
  • कंटेनमेंट जोन में रहने वाले शिक्षक, छात्र, कर्मचारियों को इंस्टीट्यूट जाकर पढ़ने की अनुमति नहीं होगी।
  • इंस्टीट्यूट खोलने से पहले पूरे परिसर, क्लासरूम, लेबोरेट्री, बॉथरूम को सैनिटाइज करना होगा।
  • बायोमेट्रिक मशीन से अटेंडेंस नहीं होगी। कॉन्टैक्ट-लेस व्यवस्था करनी होगी।

सैनिटाइजेशन और जांच के लिए गाइडलाइन?

  • एंट्री प्वाइंट पर पल्स ऑक्सीमीटर, थर्मल गन की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि एसिंप्टोमैटिक व्यक्ति का ऑक्सीजन लेवल और बॉडी टेम्प्रेचर जांचा जा सके।
  • डिस्पोजल पेपर टॉवेल, साबुन, 1% सोडियम हाइपो-क्लोराइट सॉल्यूशन का यूज होना चाहिए।
  • टीचर्स, कर्मचारियों को फेस मास्क, हैंड सैनिटाइजर, उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी स्कूल मैनेजमेंट को होगी।
  • ढंका हुआ डस्टबिन होना चाहिए और कूड़ा फेंकने की सही व्यवस्था होनी चाहिए।
  • सफाईकर्मी को काम पर लगाने से पहले सही तरह से प्रशिक्षित करना होगा।

ऐसी होगी एक्टिविटी की प्लानिंग और शेड्यूलिंग

  • ​​​​​एकेडमिक कैलेंडर ऐसा बनाया जाए जिससे भीड़ जुटने की संभावना न हो।
  • सभी छात्रों के लिए ऑनलाइन और डिस्टेंस लर्निंग प्रोग्राम का भी विकल्प देना होगा। इसे बढ़ावा देना होगा।
  • एकेडमिक कैलेंडर में ऑफ लाइन क्लास के साथ ऑनलाइन क्लास और ट्रेनिंग को भी शामिल किया जाए।
  • एक समय में एक जगह पर कम से कम लोगों को बुलाया जाए।
  • लेबोरेट्री में प्रैक्टिकल एक्टिविटी को शेड्यूल करते समय भी छात्रों की संख्या और लेबोरेट्री की क्षमता का ख्याल रखें। सोशल डिस्टेंसिंग का इसमें भी पालन करना होगा।
  • ज्यादा रिस्क वाले छात्र, कर्मचारी या शिक्षकों को अधिक सावधानी रखनी होगी। ऐसे लोगों को फ्रंट लाइन में काम न दिया जाए।

हॉस्टल के लिए ये होंगे नियम

  • ऐसे छात्र जो दूसरे शहर या राज्य से हैं और उनके पास ऑनलाइन एजुकेशन की सुविधा उपलब्ध नहीं है उन्हें हॉस्टल, गेस्ट हाउस या रेजिडेंशियल कॉम्पलैक्स अलॉट किया जा सकता है।
  • बाहर से आकर हॉस्टल में रहने वाले छात्रों को 14 दिन क्वारैंटाइन रहना होगा। इसके बाद ही छात्र क्लास अटेंड कर पाएंगे।
  • इंस्टीट्यूट में आइसोलेशन की व्यवस्था होनी चाहिए।
  • हॉस्टल में रहने के लिए आने वाले सभी छात्रों की स्क्रीनिंग की जाए। केवल एसिंप्टोमैटिक छात्र को ही हॉस्टल में रूम अलॉट किया जाए।
  • जिन छात्र में कोरोना के लक्षण दिखते हैं, उन्हें इंस्टीट्यूट के आइसोलेशन वार्ड में रखा जाए।
  • एक रूम में दो छात्रों के बेड के बीच की दूरी कम से कम 6 फीट रखी जाए।

छात्र, टीचर या कर्मचारी में लक्षण मिलने पर क्या करना होगा?

  • उसे तुरंत आइसोलेट किया जाए। जहां किसी दूसरे के जाने की इजाजत न हो।
  • पैरेंट्स को इसकी सूचना दी जाए।
  • जब तक डॉक्टरी जांच न हो जाए, तब तक उसे फेस कवर करने को कहा जाएगा।
  • नजदीकी अस्पताल या स्टेट हेल्पलाइन से तुरंत संपर्क किया जाए।
  • पूरे परिसर को फिर से डिसइंफेक्ट किया जाए।
  • स्टूडेंट या टीचर किसी मानसिक तनाव या मानसिक बीमारी से जूझ रहा है तो उसके लिए रेगुलर काउंसलिंग होगी।


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इंस्टीट्यूट के एंट्री प्वाइंट पर थर्मल स्क्रीनिंग और ऑक्सीमीटर से ऑक्सीजन का लेवल जांचा जाएगा। (फाइल फोटो)


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