संसद में रविवार को एक और रिकॉर्ड बना। लोकसभा में जनहित से जुड़े जरूरी मामलों पर बहस (मैटर्स ऑफ अर्जेंट पब्लिक इंपोर्टेंस) या जीरो आवर पहली बार आधी रात तक चला। कई सांसदों और लोकसभा सचिवालय से अधिकारियों ने बताया कि 17 अप्रैल 1952 में लोकसभा के गठन के बाद पहली बार ऐसा हुआ है। उधर, राज्यसभा में हंगामा करने वाले सांसदों पर कार्रवाई की जा सकती है।

लोकसभा की कार्यवाही रविवार को दोपहर बाद 3 बजे शुरू हुई थी। प्रश्नकाल (क्वेश्चन आवर) के बाद रात 10.30 बजे जीरो आवर शुरू हुआ, जो रात 12.34 बजे तक चला। जीरो आवर में बहस के लिए सांसदों को पहले से प्रश्न बताने की जरूरत नहीं होती।

बिल पास...मगर संसद फेल
किसान बिलों के विरोध में रविवार को राज्यसभा में विपक्ष ने सभी हदें पार कर दीं। पहले सभापति के सदन का समय बढ़ाने पर हंगामा शुरू हुआ। विपक्षी सदस्य वेल में हंगामा करने लगे। इसके बाद कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का जवाब पूरा होने के बाद जब बिल पास करने की प्रक्रिया शुरू हुई तो विपक्षी मत विभाजन (वोटिंग) की मांग करने लगे।

हंगामे की वजह से मार्शल बुलाने पड़े
उपसभापति हरिवंश मत विभाजन के लिए तैयार नहीं हुए तो तृणमूल सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने सदन की रूलबुक फाड़ दी और उपसभापति का माइक तोड़ने की कोशिश की। कांग्रेस सांसद रिपुन बोरा, आप सांसद संजय सिंह और डीएमके सांसद तिरुचि शिवा भी माइक तोड़ने की कोशिश करते नजर आए। इस वजह से मार्शल बुलाने पड़े और सदन की कार्यवाही 15 मिनट रुकी रही।

दोबारा कार्यवाही शुरू होने पर भी हंगामा हुआ तो स्पीकर ने ध्वनिमत से विधेयक पास कर दिया। राज्यसभा में हंगामे को लेकर उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू के आवास पर बैठक भी हुई। उधर, उपसभापति के खिलाफ 12 विपक्षी दलों ने अविश्वास प्रस्ताव दिया है, जिस पर 100 लोगों के साइन हैं। शाम को रक्षा मंत्री राजनाथ समेत छह बड़े मंत्रियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि राज्यसभा में जो हुआ, वह शर्मनाक था।



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लोकसभा में जीरो आवर 2 घंटे से ज्यादा चला। रात 12 बजे लोकसभा स्पीकर को समय बढ़ाना बढ़ा, हालांकि कार्यवाही अगले 4 मिनट में ही खत्म हो गई।


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