(चंद्रेश नारायणन) भारतीय टीम को काफी समय से हार्दिक पंड्या जैसे खिलाड़ी की तलाश थी। कई चैंपियन बल्लेबाज, स्पिनर और तेज गेंदबाज हुए। लेकिन हार्दिक जैसा खिलाड़ी 1996 के बाद नहीं मिला। मनोज प्रभाकर ने तभी अपना अंतिम मैच खेला था। उनके बाद अजीत आगरकर और इरफान पठान तेज गेंदबाजी ऑलराउंडर के रूप में आए।

आगरकर ने वनडे में अच्छी गेंदबाजी की, लेकिन उनकी बल्लेबाजी धीरे-धीरे खराब होती गई। दूसरी तरफ, पठान ने अच्छी शुरुआत की लेकिन जब से उन्हें बल्लेबाजी में प्रमोट किया जाने लगा, करिअर नीचे आना शुरू हो गया। पठान के बाद से कोई तेज गेंदबाजी ऑलराउंडर नहीं मिला। भारतीय टीम के लिए ऐसा खिलाड़ी काफी जरूरी था, जिससे टीम का बैलेंस बना रहता है।

हार्दिक वह बैलेंस देते हैं, क्योंकि अभी उपलब्ध सभी विकल्प में वे बेहतर हैं। उन्होंने गेंद और बल्ले से कुछ बहुत बड़ा नहीं किया है। लेकिन टीम को संतुलन देते हैं। भारत के पास अभी कई स्पिन गेंदबाजी ऑलराउंडर हैं। टेस्ट में जडेजा और अश्विन, सीमित ओवरों की क्रिकेट में सुंदर, अक्षर और क्रुणाल। हार्दिक ने कई बार वनडे में नई गेंद से शुरुआत की है। उनके स्पेल ने 2018 इंग्लैंड दौरे पर भारत को ट्रेंट ब्रिज टेस्ट जिताने में मदद की थी।

चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल और 2018 द. अफ्रीका दौरे पर उनकी शानदार पारियों से टीम भले ही नहीं जीती लेकिन आज भी उनकी बात होती है। हालांकि, वे लगातार ऐसा नहीं कर पाए हैं। भारतीय टीम से ज्यादा मुंबई इंडियंस के लिए आईपीएल में गेंद और बल्ले से प्रभाव छोड़ते हैं। उन्हें इसपर काम करने की जरूरत है। भारतीय टीम उनकी फिटनेस को लेकर भी परेशान है। लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात है कि भारत जैसे देश में हार्दिक की जगह लेने वाला खिलाड़ी नहीं है।

पिछले कुछ साल पहले स्टुअर्ट बिन्नी और ऋषि धवन को मौका मिला। विजय शंकर 2019 वर्ल्ड कप में थ्री डायमेंशनल खिलाड़ी की छवि लेकर गए। पिछले ही साल शिवम दुबे का भी डेब्यू हुआ। दुबे और विजय बल्लेबाज हैं, जो गेंदबाजी भी कर सकते हैं। लेकिन हार्दिक बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों कर सकते हैं। पिछले कुछ सालों में हरियाणा के हर्षल पटेल दावेदार बनकर उभरे हैं। लेकिन हार्दिक के स्तर से काफी पीछे हैं।

भारतीय टीम टेस्ट मैचों में विपक्षी टीम के निचले क्रम को आउट करने में जूझती है। वहीं टीम का निचला क्रम लड़ाई के बिना ही हथियार डाल देता है। हार्दिक जैसा खिलाड़ी गेंदबाजों पर से दबाव कम करने के साथ ही निचले क्रम के बल्लेबाजों के साथ बड़े शॉट खेल सकता है। उम्मीद है कि वे जल्द ही वापसी करेंगे, खासकर टेस्ट में।

टेस्ट चैंपियनशिप में भारत के लिए आने वाला साल मुश्किल होने वाला है। जहां हार्दिक जैसा ऑलराउंडर टीम के लिए बेहतर साबित हो सकता है। और इससे पहले कि हम उत्तेजित हों, हम हार्दिक की किसी से तुलना न करें। वह भारत के स्टोक्स नहीं हैं या वे अगले कपिल देव भी नहीं हैं। उनका अपना वर्जन है, उनपर टाइटल का दबाव न डालें। उन्हें काफी लंबा जाना है, लेकिन उन्हें एक बार फिर से शुरुआत करने दें।



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