यह भागलपुर है। शाम का समय है और चाय की तलब भी। सो नजर घुड़नपीर बाबा मेडिकल कॉलेज रोड की इस चाय दुकान पर ठहर गई। पहले से ही बैठे कुछ लोग चाय की चुस्की के साथ राजनीति के पन्ने पलटने में मशगूल हैं।

चर्चा कमोबेश भागलपुर जिले की सातों विधानसभा की हो रही थी, लेकिन केंद्र में भागलपुर और उससे सटा नाथनगर ही था। मैंने यूं ही सवाल फेंका कि यहां चुनाव कब है? पास बैठे एक महाशय बोले- ‘भागलपुर में 7 विधानसभा छलै, जेकरा में कि कहलगांव और सुल्तानगंज में पहिला चरण में वोटिंग हउवे, अउरी बाकी भागलपुर, नाथनगर, पीरपैंती, गोपालपुर और बिहपुर में दोसर चरण में।’

(भागलपुर की 7 सीटों में से कहलगांव और सुल्तानगंज में तो पहले चरण में ही वोटिंग है लेकिन बाकी में दूसरे चरण में)। मैंने टटोलते हुए पूछा कि- इस बार बीजेपी की क्या स्थिति है, तो तल्ख सुर में जवाब आया- ‘बीजेपी भागलपुर के अपनो बपौती सम्झैछे, लेकिन इस बारी बीजेपी के भी समझी में आबी जयते’ (बीजेपी भागलपुर को अपनी बपौती समझती है, लेकिन इस बार उसे समझ में आ जाएगा)।

उनकी इस बात पर बगल से किसी ने चुटकी ली- ‘अश्विनी चौबे यहां के विधायक रह चुके हैं, तो क्या यहां विकास की बयार नहीं बही?’ इतना सुनते ही विकास पर जैसे बहस ही छिड़ गई। लोग विकास के मुद्दों के पीछे के छलावे की दास्तानें सुनाने लग गए।

वो सज्जन बिफर कर बोलने लगे- ‘पटना से पहनै घोषित स्मार्ट सिटी भागलपुर आज गन्दगी के ढेर में बदली गेलो छै और अभियो स्थिति वो है, जो 15 साल पुराना छै। अश्विनी चौबे ह यहां केतना साल तक विधायक रहलै, लेकिन शहरो के सबसे बड़ो समस्या जाम से मुक्ति नै दिलावा पारलकै।

भागलपुर के सांसद रहै शाहनवाज हुसैन तनिमनी कोशिश कर लकै, लेकिन अभियो स्थिति उहे छै अउरी लोगों के हाल जाम से बेहाल छै। जाम के समस्या के बाद यहां के दोसरो सबसे बड़ो समस्या शहर के दक्षिणी भाग के जोडै वाला भोलानाथ पूल के छै जे हरदम पानी में डूबले रहै छै। यहां ओवर ब्रिज के मांग केतना सालों से करी रहलों छै। आरो हवाई अड्डा के भी मांग केतना सालों से होय रहलो छै।’

इसी बीच एक दुबले पतले शख्स ने जोड़ा- ‘भागलपुर विधानसभा में दीपू भूमानिया आरो लोजपा के उम्मीदवार आरो अभी के उपमेयर राजेश वर्मा वोटकटवा से ज्यादा कुछु नै छै।’

मैंने बात घुमाते हुए भागलपुर विधानसभा से सटे नाथनगर के बारे में पूछा तो अब तक खामोश बैठे एक अन्य शख्स बोल पड़े- 'उस विधानसभा की तो पूछिये ही मत।’

तेज आवाज में बोले- ‘इस एरिया में लॉ एंड ऑर्डर फेल है। क्राइम का ग्राफ इतना बढ़ा हुआ है कि पूछिये मत। यह एक तो बाढ़ पीड़ित क्षेत्र है और दूसरा कि इसका एक बड़ा हिस्सा दियारा क्षेत्र को छूता है, जिसका फायदा अपराधियों के छुपने में सहायक सिद्ध होता है। यहां वर्तमान विधायक जदयू के लक्ष्मीकांत मंडल हैं। इनसे पूर्व अजय मंडल भी थे, जो अभी भागलपुर के सांसद हैं लेकिन

डबल इंजन की सरकार होने के बावजूद भी विकास की बयार बहाने में असफल रहे। इसकी वजह जातीय समीकरण का विकास के मुद्दों पर हावी होना रहा है।’

बात को समेटते हुए मैंने गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र की चर्चा छेड़ी तो दूर से एक आवाज आई- ‘अरे चाहे जहां की बात कर लीजिए, भागलपुर की चर्चा और चिंता दोनों हवाई ही रही हैं। न कभी किसी ने यहां की जाम की समस्या का हल निकाला और न जल निकासी का। सिल्क सिटी तो बीते दिनों की बात हो गई है। गंदगी तो जैसे इस शहर का गहना ही है।’

ये बातें चाल ही रही थीं कि एक अधेड़ सज्जन बोल पड़े- ‘अरे 10-15 साल से तो हम ही देख रहे हैं यहां का विकास। हवाई जहाज भी उड़ते देख ही लिया! सब अपन-अपन उड़ाए और चल दिये। शाहनवाज तो बड़ी तेजी दिखाए थे, क्या हुआ... हवाई अड्डा बना क्या...!’

एक दूसरी आवाज आई– बना भी और हवाई जहाज उतरा भी, लेकिन उसका ज्यादे इस्तेमाल गोबर पाथने से लेकर मवेशी चराने में ही होता है। हां, कभी कभार सरकारी दौरे के लिए उसका जरूर इस्तेमाल होता है। भागलपुर की जनता उसी को देख के खुश हो जाती है। बातचीत इसी नोट पर थोड़ा थमी तो मैंने भी अपना रास्ता पकड़ा है, यह सोचते हुये कि क्या भागलपुर का विकास भी कभी राह पकड़ेगा!



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